स्वदेशी रक्षा सिस्टम: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का आत्मनिर्भर रक्षा कदम 1 लाख करोड़ की खरीद को दी मंजूरी
India News: स्वदेशी रक्षा सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी ताकत दिखाई। ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की सफलता ने दुनिया को चौंकाया। भारत ने अब विदेशी फाइटर जेट्स जैसे राफेल, F-35, या S-500 खरीदने के बजाय स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी। इसमें माइन काउंटरमेजर वेसल्स और QRSAM जैसे देसी सिस्टम शामिल हैं।
माइन काउंटरमेजर वेसल्स की खरीद
भारत ने 12 माइन काउंटरमेजर वेसल्स की खरीद को मंजूरी दी। इनकी लागत 44 हजार करोड़ रुपये है। ये विशेष युद्धपोत 900-1000 टन विस्थापन क्षमता वाले हैं। ये সমुद्र में दुश्मन द्वारा बिछाई गई माइंस को नष्ट करेंगे। चीन और पाकिस्तान के सैन्य गठजोड़ को देखते हुए ये पोत नौसेना के लिए जरूरी हैं। ये युद्धपोत बंदरगाहों और जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ताकत मिलेगी।
QRSAM से मल्टी-लेयर डिफेंस मजबूत
सरकार ने 36 हजार करोड़ रुपये की लागत से स्वदेशी रक्षा सिस्टम QRSAM की खरीद को मंजूरी दी। DRDO द्वारा विकसित यह मिसाइल थलसेना और वायुसेना को दी जाएगी। यह 30 किमी की दूरी से दुश्मन के फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन्स को नष्ट कर सकती है। QRSAM को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। यह S-400 और आकाश के साथ भारत की मल्टी-लेयर डिफेंस को मजबूत करेगा।
ISTAR विमानों से बढ़ेगी खुफिया क्षमता
तीन ISTAR विमानों की खरीद को 10 हजार करोड़ रुपये में मंजूरी मिली। ये विमान खुफिया जानकारी, निगरानी और टारगेट खोज में सक्षम हैं। इनमें DRDO के स्वदेशी सेंसर, सिंथेटिक अपर्चर रडार, और इन्फ्रारेड सेंसर लगे हैं। ये स्वदेशी रक्षा सिस्टम दुश्मन के अभेद्य ठिकानों को भेदने में मदद करेंगे। ये विमान युद्ध में सटीक निशाना लगाने और रणनीतिक जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी र Anno Domini रक्षा सिस्टम की सफलता ने भारत की रक्षा ताकत को दुनिया के सामने ला दिया। सरकार का यह कदम आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा है। विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब अपने पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर काम कर रहा है। माइन स्वीपर्स, QRSAM और ISTAR जैसे देसी सिस्टम भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।


